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किसान नरवाई न जलाएं, नरवाई प्रबंधन अपनाए

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664*जिले में किसानों के खेतों पर पहुंचकर उन्हें नरवाई न जलाने एवं नरवाई प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। कृषि विभाग सागर के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (एसएडीओ) अवधेश राय द्वारा बीना विकासखंड के ग्राम गोदना में किसान धीरज सिंह के खेत पर पहुंचकर गेहूं की नरवाई में पूसा बायोडीकंपोजर, इफको डीकंपोजर का प्रदर्शन सभी किसान भाइयों के समक्ष किया गया। इस अवसर पर किसानों को नरवाई न जलाने एवं नरवाई प्रबंधन हेतु प्रेरित किया गया और एक नई पहल के रूप में बायोडीकंपोजर को कैसे तैयार करना है तथा उसका सही तरीके से उपयोग (स्प्रे) कैसे करना है, इसके संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। नरवाई को बायोडीकंपोजर की सहायता से आसानी से मिट्टी में मिलाकर उत्तम जैविक खाद में बदला जा सकता है। यह एक सस्ता, सरल और आसानी से उपलब्ध उपाय है। मात्र ₹25 में मिलने वाला 50 ग्राम बायोडीकंपोजर एक एकड़ खेत के लिए पर्याप्त होता है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (एसएडीओ) अवधेश राय बताते हैं कि 25 लीटर पानी में 50 ग्राम बायोडीकंपोजर, 750 ग्राम गुड़ और 50 ग्राम बेसन मिलाकर घोल तैयार करें। इस घोल को एक सप्ताह (7 दिन) के लिए ढककर रख दें। एक सप्ताह बाद इस घोल को एक एकड़ खेत में नरवाई पर अच्छी तरह स्प्रे करें। 7-8 दिनों के भीतर यह नरवाई को सड़ाकर मिट्टी में मिला देता है और इसे पौष्टिक खाद में परिवर्तित कर देता है। नरवाई और पराली को जलाने के बजाय बायोडीकंपोजर का उपयोग करें और इसे जैविक खाद में बदलें। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ेगी, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और खेती की लागत भी कम होगी

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